Amarkant Singh / Tue, Mar 3, 2026 / Post views : 447
पर्ची वाले मुख्यमंत्री अपनी मर्जी के चलते अपने सीनियर नेता को हमेशा नीचे दिखाने का काम करते हैं जिससे सीनियर नेता मध्य प्रदेश के भी सकते में है जिसको लेकर अब मध्य प्रदेश का विधानसभा बजट सत्र समाप्त होने के बाद 28 फरवरी को मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष से भी मुलाकात की। जैसे ही मुख्यमंत्री की दोनों के साथ मुलाकात खत्म हुई। तुरंत बाद अमित शाह के दफ्तर ने कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को दिल्ली तलब किया गया है। इसके बाद दोनों मंत्रियों ने दिल्ली पहुंचकर अमित शाह से मुलाकात की। विधानसभा सत्र के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने जो बयान दिए थे। उनके बयान से पार्टी की जमकर किरकिरी हुई थी। सरकार पर विपक्ष ने भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में जमकर विरोध किया था। हालांकि, सवाल एक नहीं है…सवाल तो कई हैं। क्योंकि भागीरथपुरा दूषित पानी के बाद भी कैलाश विजयवर्गीय के तीखे और तल्ख तेवर दिखे। उन्होंने विधानसभा सत्र में भी नजर कहीं और निशाना कहीं और…लगाया। राजनीतिक गलियारों में कयासों के दौरा जारी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा में हुई बयानबाजी को लेकर दोनों नेताओं को मुलाकात के लिए दिल्ली बुलाया था।कैलाश बोले- सारे कुत्तों से मुझे ही निपटना पड़ता है…विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष ने डॉग बाइट को लेकर सवाल खड़े किए थे। इसको लेकर कैलाश ने श्वानों को इंसाना का पुराना दोस्त बताया था। जिस पर भंवर सिंह शेखावत ने उन्हें कुत्तों का प्रभारी मंत्री कह दिया। जिस पर कैलाश ने तंज कसते हुए कहा कि तंज कसते हुए कहा कि सारे कुत्तों से मुझे ही निपटना पड़ता है।सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, हमारी यह मंशा नहीं थी, हम तो कह रहे थे कि सदन में जो कबूतर उड़ रहा है, वह भी हमें कुछ सिखाने के लिए आया है। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, मुझे पता नहीं है, इतने समय से, इतने साल से सदन चल रहा है, आज ही कबूतर क्यों आया। यह दिल्ली से तो नहीं आया (हंसते हुए) मैंने पहली बार अंदर कबूतर देखा है।क्या है वो वजह जिससे दोनों मंत्री नाखुश सूत्र की मानें तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल पार्टी के सीनियर नेताओं में से एक हैं। इन मंत्रियों में से एक के पास नगरीय पंचायत तो एक के पास पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है। इन दोनों अपने जूनियर साथी के नीचे काम करना पड़ रहा है, जिसका दर्द समय दर समय छलकता रहता है।. अब देखने वाली बात यह है की पर्ची वाले मुख्यमंत्री का कार्यकाल कितने दिन और चलता है
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