Amarkant Singh / Mon, Feb 23, 2026 / Post views : 388
भिण्ड जिले में रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। इन दिनो भिंड जिला रेत के अवैध और खनन का केंद्र बना हुआ है भिंड जिले में अवैध और खनन पर कब रोक लगेगी या एक देखने वाली बात होगी क्योंकि भिंड जिले में माफिया बहुत सक्रिय हैं मेंहदा में खनिज विभाग की टीम ने 'छापामार' कार्रवाई तो की, लेकिन हाथ लगी सिर्फ एक पनडुब्बी। अब सवाल यह उठता है कि क्या सिंध नदी में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध उत्खनन के खेल में सिर्फ एक मशीन ही शामिल थी, या फिर यह विभाग की महज 'कागजी खानापूर्ति' है? भिंड जिला प्रशासन के कड़े निर्देशों का हवाला देकर विभाग अपनी पीठ भले थपथपा ले, लेकिन धरातल की हकीकत बेहद कड़वी है। रौन क्षेत्र के मेंहदा में सिंध नदी के बीचों-बीच पनडुब्बी डालकर सरेआम नदी का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है। रविवार को जब खनिज अमला पहुंचा, तो वहां एक पनडुब्बी अवैध खनन करते हुए पाई गई। जब भी ऐसी बड़ी कार्रवाई होती है, अक्सर मुख्य आरोपी और अन्य मशीनें मौके से गायब मिलती हैं। क्या विभाग के भीतर ही माफिया के मुखबिर बैठे हैं? पूरी नदी में मशीनों का जाल बिछा है, लेकिन प्रशासन की झोली में सिर्फ एक पनडुब्बी का आना ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। विभाग बार-बार कहता है कि कार्रवाई 'निरंतर जारी' रहेगी, लेकिन माफिया के दुस्साहस को देखकर लगता है कि इन पर जुर्माना और जप्ती का कोई असर नहीं हो रहा। मेंहदा और आसपास के इलाकों में सिंध नदी को छलनी किया जा रहा है। पनडुब्बियों के जरिए गहरे पानी से रेत निकालकर न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि शासन को करोड़ों के राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है। रविवार की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्षेत्र में अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। क्या खनिज विभाग वाकई रेत माफिया की कमर तोड़ना चाहता है, या फिर समय-समय पर ऐसी छोटी कार्रवाइयां करके बड़े मगरमच्छों को सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है? क्योंकि भिंड जिले में इन दोनों लोगों की चर्चा है कि पुलिस और खनिज विभाग की मिली भगत से अवैध रूप से उत्खनन जोड़ों पर हो रहा है यहां कादरी खाना पूर्ति हो रही है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है
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