Amarkant Singh / Thu, Feb 12, 2026 / Post views : 270
शिक्षण व्यवसाय से निजी स्कूल संचालकों का हुआ मोहभंग,ग्यारह हायर सेकेंडरी-हाई स्कूल संचालकों ने मान्यता रिन्यूअल के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर नहीं किया अप्लाई,कई स्कूल संचालकों ने जिला शिक्षा विभाग को स्कूल बंद करने का दिया आवेदन,स्कूलों में लटके ताले, जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रेस नोट जारी कर ऐसे स्कूलों में बच्चों के दाखिला ना कराने की अपील।
एंकर-भिंड जिला शिक्षा विभाग द्वारा जनसंपर्क के माध्यम से एक प्रेस नोट जारी किया गया है, जिसमें भिंड जिले के हाई स्कूल एवं हाई सेकेंडरी के 11 स्कूलों द्वारा मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर 31 दिसंबर अंतिम तिथि तक अप्लाई नहीं किया गया है, लिहाजा मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा उनको मान्यता नहीं प्रदान की गई जिसके जिला शिक्षा अधिकारी आरडी मित्तल ने पालकों से अपील करते हुए प्रेस नोट जारी किया है कि इन स्कूलों में छात्रों का दाखिला न करवाए, लेकिन जब जी मीडिया की टीम ने इन स्कूलों द्वारा मान्यता ना लेने के संबंध में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष अवधेश शर्मा से बातचीत की तो चौंकाने वाला सच सामने आया है, अवधेश शर्मा का कहना है कि भिंड जिले की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने में निजी विद्यालयों का एक बड़ा योगदान है, लेकिन बिगत वर्षों में एमपी बोर्ड द्वारा भारी भरकम और कठोर नियम लाद दिए गए हैं जिनको पूरा करना स्कूल संचालकों के लिए टेडी-खीर साबित होता जा रहा है,स्कूल चलाने के लिए मान्यता प्राप्त के लिए लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केंद्र के तहत सबसे पहले भारी-भरकम एफडीआर, रजिस्टर्ड किरायानामा, जिस जमीन पर स्कूल की बिल्डिंग बनी है उसका डायवरसन, समिति के नाम स्कूल की जमीन,3हजार से 6 हजार बर्गफुट खुला क्षेत्र, खेल मैदान, योग्य शिक्षक, डीएड-बीएड, प्रयोग शाला, समेत कई तरह की और कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिनका पालन करना स्कूल संचालकों के लिए कठिन होता जा रहा है और हर साल स्कूल बंद हो रहे हैं, और कुछ बंद होने की कगार पर है, ऐसे में स्कूल संचालक शिक्षक व्यवसाय को छोड़कर अन्य व्यावसायिक की ओर रूख करने लगे है, क्योंकि मध्य प्रदेश में शिक्षण व्यवसाय घाटे का सौदा साबित हो जा है, अवधेश शर्मा का मानना है कि यही हाल रहा टी आने वाले समय में निजी स्कूल बीते समय की बातें हो जाएगी
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